भूमिका :
पिछले कुछ वर्षों से समाज में पुरुष वर्ग की प्रधानता बनी हुई हैं, जिसके कारण महिलाओं में मन और मस्तिष्क में यह बात घर कर गयी हैं, कि समाज में पुरुष ही श्रेष्ठ हैं, जिसके कारण और हर निर्णय लेने की प्रक्रिया में पुरुषों पर निर्भर करती हैं, जो एक विकसित समाज के लिए घातक हैं। इस स्थिति को दूर करने और महिलाओं को अपनी शक्ति का आभास कराने और निर्णय प्रक्रिया में भूमिका को बढ़ावा देने के लिए सरकारी और गैर-सरकारी स्तर पर कई प्रकार के कदम उठाए जाते हैं, इन कदमों के उठाए जाने की प्रक्रिया को महिला सशक्तिकरण कहा जाता हैं।
वर्तमान स्थिति :
अगर आज के समय में जब भी महिला सशक्तिकरण की बात की जाती हैं, तो अक्सर सुनने को मिलता है कि फलाँ महिला देश की प्रधानमन्त्री बन गयी,फलाँ महिला देश की सबसे बड़ी पार्टी की अध्यक्ष है, या फलाँ महिला सर्वश्रेष्ठ पदों पर पहुँच गयी है...आदि। इसी बात को महिला सशक्तिकरण मान लिया जाता है। हालाँकि इस बात बहुत कम ध्यान दिया जाता हैं कि सिर्फ चुनिन्दा महिलाओं के सशक्तिकरण से न तो समाज में उल्लेखनीय परिवर्तन आएगा न ही इससे महिलाओं की स्थिति में सुधर होगा। इसके लिए हमें उन महिलाओं पर भी ध्यान केन्द्रित करना होगा, जो समाज के हासिये पर स्थित हैं। यहीं वह कारण हैं जिसके कारण तमाम दावों और योजनाओं के बावजूद महिला सशक्तिकरण की रफ्तार काफी धीमी हैं।
महिला सशक्तिकरण की दिशा में आने वाली चुनौतियाँ :
ऐसा नहीं हैं कि महिला सशक्तिकरण के लिए कदम बढ़ाया जाए और वह सफल ही हो, इसके राह में भी कई बाधा हैं जैसे- पुरुष प्रधान समाज की मानसिकता, रूढ़िया, शिक्षा का आभाव, राजनीतिक संवेदनशीलता। पुरुष मानसिकता से ग्रसित समाज को लगता हैं कि महिलाओं के आत्मनिर्भर होने से पुरुषों का रुतबा कम होगा और इसलिए उसपर तमाम तरीके की बंदिशें लगायी जाती हैं।
1. महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल का आभाव : सशक्तिकरण की पहली शर्त खुद को जोखिम से डरने के लिए नहीं बल्कि लड़ने के लिए तैयार करना हैं। सुरक्षित माहौल न होने के कारण कोई भी महिला या उसके परिजन उसे इस दिशा में बढ़ने की अनुमति नहीं देते जिससे तमाम कोशिशों के बावजूद महिला सशक्तिकरण पूरा नहीं होता।
2.परम्परागत रूढ़ियाँ
3.शिक्षा की कमी
4. राजनीतिक संवेदनशीलता
5. पुरुष प्रधान समाज(male dominented society)
महिला सशक्तिकरण को गति देने के लिए सुझाव :
1. शिक्षा को बढ़ावा देना
2. महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल बनाना
3. महिलाओं के ऊपर होने वाले अपराध का त्वरित निपटान
4.महिलाओं के प्रति होने वाली असमानता को सामने लाना
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